- न्यास का नाम
इस न्यास का नाम “गोरक्षनाथ सनातन संघ” होगा, जिसे इस संविधान में आगे “न्यास” या “ट्रस्ट” कहा गया है।
- पंजीकृत कार्यालय
न्यास का पंजीकृत कार्यालय निम्न पते पर स्थित होगा –
मौजा दाउदपूर, तारामंडल, ओंकार फर्नीचर के पास, पी-मार्ट, गोपालापुर चौराहा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश – 273001।
न्यास मण्डल के निर्णयानुसार अन्य कार्यालय भी स्थापित किए जा सकेंगे।
- कार्यक्षेत्र
न्यास का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष होगा तथा आवश्यकता पड़ने पर विधि-सम्मत रूप से भारत के बाहर भी न्यास के उद्देश्य अनुसार कार्य किए जा सकेंगे।
- न्यास का स्वरूप
यह न्यास एक गैर-लाभकारी, धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं कल्याणकारी न्यास है, जिसकी स्थापना जनकल्याण एवं समाज के सर्वांगीण विकास हेतु की गई है।
- न्यास के उद्देश्य
न्यास के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित होंगे—
- समाज में सुख, शांति, सद्भावना, विश्वास, सदाचार एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना करना।
- सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण व प्रचार करना।
- मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का निर्माण, जीर्णोद्धार एवं विकास करना।
- निर्धन, असहाय, वृद्ध, विकलांग एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना।
- शिक्षित बेरोजगार युवाओं को तकनीकी, व्यावसायिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
- विद्यालय, महाविद्यालय, तकनीकी एवं व्यावसायिक संस्थानों, पुस्तकालयों एवं छात्रावासों की स्थापना एवं संचालन करना।
- महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, गौ-रक्षा एवं पशु कल्याण के लिए कार्य करना।
- स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सालयों एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का संचालन करना।
- न्यास कोष
न्यास की स्थापना हेतु ₹11,000/- (ग्यारह हजार रुपये मात्र) का प्रारम्भिक न्यास कोष स्थापित किया गया है।
न्यास कोष में दान, चन्दा, अनुदान, सहायता राशि एवं वैध माध्यमों से धन प्राप्त किया जा सकेगा।
- न्यास मण्डल
न्यास का संचालन न्यास मण्डल द्वारा किया जाएगा, जिसमें मुख्य न्यासी (अध्यक्ष) एवं अन्य न्यासी सम्मिलित होंगे।
मुख्य न्यासी न्यास के सर्वोच्च प्रशासक होंगे।
- प्रशासन एवं अधिकार
- न्यास मण्डल को चल-अचल सम्पत्तियों के क्रय-विक्रय, प्रबंधन एवं संरक्षण का अधिकार होगा।
- न्यास के संचालन हेतु नियमावली, उपनियम एवं निर्देश बनाए जा सकेंगे।
- न्यास की बैठकें समय-समय पर आयोजित की जाएंगी।
- आय का उपयोग
न्यास की समस्त आय एवं सम्पत्ति का उपयोग केवल न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाएगा। किसी भी न्यासी को निजी लाभ नहीं दिया जाएगा।
- न्यास का विघटन
न्यास के विघटन की स्थिति में शेष सम्पत्ति समान उद्देश्य वाले किसी अन्य न्यास को विधि अनुसार हस्तांतरित की जाएगी।
📄 पेज–2 : संगठन संविधान
(गोरक्षनाथ सनातन संघ – संगठनात्मक संविधान)
- संगठन का नाम
इस संगठन का नाम “गोरक्षनाथ सनातन संघ” होगा।
- संगठन का उद्देश्य
संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास हेतु कार्य करना है।
- संगठन की विचारधारा
संघ “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित होकर बिना किसी जाति, धर्म, वर्ग अथवा लिंग भेद के सेवा कार्य करेगा।
- संगठनात्मक संरचना
संघ की संरचना निम्न स्तरों पर होगी—
- राष्ट्रीय स्तर
- प्रांतीय / राज्य स्तर
- जिला स्तर
- ब्लॉक / तहसील स्तर
- ग्राम / नगर स्तर
- विशेष प्रकोष्ठ
संगठन के अंतर्गत निम्न विशेष प्रकोष्ठ कार्य करेंगे—
- युवा मोर्चा
- महिला मोर्चा
- सेवा प्रकोष्ठ
- गौ-रक्षा प्रकोष्ठ
- पर्यावरण प्रकोष्ठ
- विधिक प्रकोष्ठ
- आईटी एवं सोशल मीडिया प्रकोष्ठ
- शिक्षा एवं कौशल विकास प्रकोष्ठ
- पदाधिकारी
संगठन के प्रमुख पदाधिकारी होंगे—
- राष्ट्रीय अध्यक्ष
- कार्यकारी अध्यक्ष
- महासचिव
- संगठन मंत्री
- उपाध्यक्ष
- सचिव
- कोषाध्यक्ष
- मीडिया प्रभारी
- नियुक्ति प्रक्रिया
- राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा राज्य अध्यक्षों की नियुक्ति।
- राज्य अध्यक्ष द्वारा जिला अध्यक्षों की नियुक्ति।
- जिला अध्यक्ष द्वारा ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति।
- ब्लॉक अध्यक्ष द्वारा ग्राम / नगर इकाइयों की नियुक्ति।
- कोष एवं लेखा व्यवस्था
संगठन का कोष बैंक/डाकघर में संचालित होगा।
सभी आय-व्यय का लेखा पारदर्शी रूप से रखा जाएगा एवं वार्षिक लेखा परीक्षण कराया जाएगा।
- अनुशासन एवं आचरण
संगठन के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य संगठन के नियमों, मर्यादाओं एवं अनुशासन का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
- संविधान की बाध्यता
यह संगठन संविधान संघ की सर्वोच्च नियमावली होगी तथा संघ की सभी इकाइयाँ एवं पदाधिकारी इसके अधीन कार्य करेंगे।







